आज बात करते हैं समुद्र तल से 7200 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं माँ तारा देवी के ऐतिहासिक मंदिर की जो शिमला शहर से लगभग 11 किलोमीटर हैं। 250 साल पुराने मंदिर की स्थापना 1766 ई0 में सेन वंश के शक्तिशाली राजा भूपेंद्र सेन के द्वारा जुग्गर गाँव की एक ऊँची पहाड़ी की गई थी. मंदिर से पहले यंहा पर एक घना जंगल हुआ करता था, लोगों की मान्यता है कि जुग्गर के जंगल के माँ तारा देवी वास करती हैं. तारा देवी मंदिर जाने के लिए आप टैक्सी, बस और अपने निजी वाहन का सहारा ले सकते हैं। बस आपको पुराना बस अड्डा शिमला से मिल जाएगी और टैक्सी किसी भी स्टैंड से कर सकते हैं, जो आपको शोघी होते हुए तारा देवी मंदिर ले जाएगी। ट्रैकिंग के शौकीन लोगों तारा देवी मंदिर जाने के लिए कच्ची घाटी से लगभग 6 किलोमीटर का पैदल पथ भी है जिसका लुफ्त उठा सकते हैं पैदल मार्ग से आपको गहरी और सुंदर वादियां, हरियाली, लम्बे-लम्बे चीड़, क्वेर्कस इन्काना बांज, सागौन, देवदार के पेड़, सकरा रास्ता जो आपकी यात्रा को एडवेंचर बना देगा। रास्ते मे आराम करने के लिए जगह जगह बेंच लगी हैं, जिस पर बैठकर आराम कर अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं. बीच रास्ते मे आपको बड़े-बड़े लंबे घने पेड़ आपका मन मोह लेंगे। हरे भरे पेड़ों से लदे पहाड़ यात्रा का सुखद अनुभव देंगे। रास्ते मे ऐसी कई जगह हैं जंहा पर बैठकर आप पिकनिक का आनंद भी ले सकते हैं। माँ तारा देवी की यात्रा के दौरान नीचे की तरफ घाटी में एक सदियों पुराना शिव मंदिर पड़ता है वंहा भी आप शिव दर्शन कर आगे बढ़ सकते हैं वापस आते वक्त भी आपको शिव दर्शन प्राप्त हो जाएंगे आप अपनी सुविधानुसार चयन कर सकते हैं परन्तु दर्शन जरूर करें। रास्ते के लिए खाने-पीने की चीज साथ रख कर जाएं तो यात्रा ज्यादा सुखद होगी। पिकनिक का प्लान भी आप बना सकते हैं, रास्ते मे एक खेल का मैदान भी पड़ेगा ज्यादा बड़ा तो नही होगा पर आप अपने समय और सुविधा के अनुसार कोई भी खेल खेल सकते हैं। ट्रैकिंग के वक़्त आपको पानी और खाने की आवश्यकता पड़ेगी। 5 से 6 किलोमीटर की ट्रैकिंग में लगभग 2 से 3 घंटे लग सकते हैं. परंतु वापस आने में समय की काफी बचत होगी। स्वस्थ व्यक्ति ही ट्रैकिंग करे ऐसा मेरा सुझाव है क्योंकि अस्वस्थ व्यक्ति को चढाई करते वक़्त सांस की समस्या उत्पन्न हो सकती है. अस्वस्थ व्यक्ति अगर माँ तारा देवी के दर्शन करना चाहता है तो वह बस, टैक्सी या अपने निजी वाहन का इस्तेमाल करे ज्यादा समस्या नहीं आएगी जंहा पर आपको बस उतारेगी वंहा से सीढ़ी और स्लोप के द्वारा मंदिर परिसर में पहुंच सकते हैं खाने पीने की चीजों के लिए एक बैग जरूर रखे क्योंकि बंदर आपके खाने-पीने की चीजों पर झपट सकते हैं और साथ आपको नुकसान भी पहुचा सकते हैं।
अब बात करते हैं की मंदिर के इतिहास की, मंदिर का निर्माण सेन वश राजा भूपेंद्र सेन ने करवाया था। यह मदिर हिंदू धर्म के साथ बौद्ध धर्म के लिए भी काफी महत्त्व रखता है। माँ तारा देवी की बनी लकड़ी की प्रतिमा आपको आकर्षित करेगी। मंदिर परिसर को बनाने में अधिकतर लकड़ी का प्रयोग किया गया है जो परिसर की सुंदरता का मनोरम दृश्य आपकी यात्रा यादगार बना देगा।
स्थानीय निवासियों के अनुसार माँ तारा देवी क्योंथल रियासत की कुलदेवी मानी जाती है. एक बार राजा भूपेंद्र सेन जुग्गर के जंगल में शिकार करने के लिए के लिए गए वंही पर झाड़ियों में से शेर के गर्जने की आवाज सुनाई दी फिर थोड़ी देर बाद वंही से एक स्त्री की आवाज सुनाई दी और राजन से बोली की हे राजन मैं तुम्हारी कुलदेवी हूँ जिसे तुम्हारे पूर्वज बंगाल में ही भूल से छोड़ आये थे, तुम मेरी मूूर्ति की यंही पर स्थापना करा दो और मैं तुम्हारे कुल की रक्षा करुँगी राजा ने तुरंत ही आदेश का पालन किया और गांव जुग्गर की ऊंची पहाड़ी पर माँ तारा देवी की मूर्ति की स्थापना विधि विधान के साथ करवा दी।
माँ तारा देवी के दर्शन के साथ भंडारे का आनंद भी ले सकते हैं, प्रत्येक रविवार और कभी-कभी मंगलवार को भी भण्डारे का आयोजन यंहा पर किसी न किसी व्यक्ति (भक्त ) द्वारा भण्डारे का आयोजन किया जाता है, कोई भी प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकता है और कोई भी भंडरा आयोजन करवा सकता है| तारा देवी मंदिर परिसर में मंदिर न्यास समिति बानी हुई है जो मंदिर का रख रखाव और भण्डारे आयोजित होता है. रविवार के भंडारे का आयोजन करने के लिए यंहा पर पहले ही बुकिंग करवानी पड़ती हैं बुकिंग में आपको एक तारीख मिलती है वो तारीख महीने बाद, साल बाद, पांच साल बाद की भी हो सकती है. भण्डारे की डेट आने से तीन महीने पहले एक रिमांडर भेजा जाता है और बताया जाता है की आपकी बारी इस इन आएगी। भण्डारा आयोजित करने के लिए कोई भी पैसा जमा नहीं होता है सिर्फ भंडारे के एक दिन पहले आपको भंडारे का राशन मंदिर परिसर में पहुंचना होता है. भण्डरा किसके द्वारा आयोजित का नाम भी पंदिर परिसर के गेट के पास लगा दिया जाता है अगर वो चाहे तो नाम गुप्त भी रखवा सकता है. बुकिंग के लिए मंदिर का ऑफिस 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक खुला रहता है और इस समय के बीच कोई भी आकर बुकिंग करवा सकता है. मंगलवार का भंडारा करवाने के लिए डेट की समस्या नही होती जल्दी ही भंडारे की डेट मिल जाती है।
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