Wednesday, 17 February 2021

शिमला की यादगार यात्रा - अनोखा शहर (जाखू मंदिर)

वीरेंद्र कुमार- समुद्र तल से 8048 फिट शिमला का जाखू मंदिर जाखू चोटी पर स्थित है यह मंदिर भगवान श्री राम भक्त हुनुमान जी को समर्पित है। शिमला में प्रवेश करते ही आपको जाखू हिल पर लगी हनुमान जी की 108 फिट ऊंची प्रतिमा के दर्शन होने शुरू हो जाएंगे। जाखू मंदिर पहुँचने के लिए रिज मैदान के स्पॉट मॉल मार्ग से लगभग 2 किलोमीटर पैदल मार्ग, पुराना बस अड्डा शिमला से टैक्सी से 7 किलोमीटर और रिज मैदान के पास बने टिम्बर ट्रेल के द्वारा मंदिर तक आराम से पहुंचा जा सकता है। ट्रेकिंग के शौकीन लोगों के लिए रिज मैदान से गया पैदल रास्ता ज्यादा लुभावन रहेगा। पैदल चलने के लिए सरकार द्वारा बनवाई गई सीढ़ी और आराम करने के लिए बेंच की व्यवस्था की गई है, थकावट महसूस होते जी 

आराम कर सफर फिर से शुरू किया जा सके। रास्ते मे आपको हर भरे पहाड़, लंबे-लंबे देवदार और सागौन के पेड़ों की हरियाली आपका मनमोह कर सफर को यादगार बना देगा, फ़ोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए रास्ते मे तरह-तरह की जगह मिलती है जो फोटोग्राफी को खूबसूरत बना देती हैं , टिम्बर ट्रेल से सफर करने वालों को पहाड़ों की गहराई और देवदार- सागौन के पेड़ों के बीच से गुजरती टिम्बर ट्रेल देख कर एक जन्नत का एहसास मिलेगा साथ ही समय की बचत भी होगी। जाखू मन्दिर एक ऐतिहासिक जगह है यह जगह रामायण काल की बताई जाती है लोगों का कहना है कि जब राम रावण का भयंकर युद्ध चल रहा था  और लक्ष्मण जी मेघनाथ के वार से जब मूर्क्षित हो गए थे तब हनुमान जी ने वैधराज सुषेण के कहने पर संजीवनी बूटी लेने के लिए अपने कुछ सैनिकों के साथ जा रहे थे और रात्रि विश्राम के लिए हनुमान जी ने इसी पहाड़ी को चुना परन्तु हनुमान जी ने अपने साथियों को जाखू पहाड़ी पर विश्राम करता छोड़ अकेले ही संजीवनी बूटी लेने के लिए सफर पर निकल गए और उनके साथियों ने ने सोचा कि हनुमान जी उनसे नाराज़ होकर अकेले निकल गए और  इसी पहाड़ी पर हनुमान जी के लौटने का इन्तज़ार करने लगे। आज भी हनुमान जी के पद चिन्ह इस पहाड़ी पर पाए जाते हैं जिसे संगमर लगा कर संरक्षित कर दिया गया है। इसलिए यंहा पर आज भी वानर सेना पाई जाती है, बंदरों के झुंड आज भी यंहा निवास करता है। मान्यता है कि यंहा पर मांगी गई सभी की मुराद पूरी होती है। यंहा पर पार्क में घूमने और कैंटीन में खाने पीने का आनंद ले सकते हैं। प्रत्येक त्यौहार,  रविवार और कभी-कभी मंगलवार को यंहा पर बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन भी किया जाता है जिसमे कोई भी भक्त जाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकता है। 

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