प्यार हमे किस मोड़ पे ले आया .............
ज़िन्दगी हमे कब क्या सीखा
दे पता ही नहीं चलता हर पल हमे ज़िन्दगी कुछ न कुछ न कुछ सिखाया ही करती है | कुछ
अच्छा सिखाती है तो कुछ बुरा अच्छा जब सिखाती है तब हम उसे हमेशा याद रखने की
कोशिस करते हैं और अगर ज़िन्दगी ने कुछ बुरा सिखाया तो उसे बुरा वक़्त मानकर भूलने
की कोशिस करते हैं परन्तु फिर भी हम इसमें कामयाब नहीं हो पाते | ज़िन्दगी भी कितनी
अजीब है हम उसे तब तक नहीं छोड़ सकते जब तक ज़िन्दगी न चाहें और यंही पर किस्मत का
कनेक्सन भी बहुत ही अजीब है जो मौत पर भी पहरा लगा देती है| अक्सर जब अकेला तन्हा
बैठता हूँ तो बहुत सोचता हूँ की ज़िन्दगी कन्हा से कन्हा ले आई हमे| ज़िन्दगी में
उतार चढ़ाव इतनी जल्दी आये की हम समझ ही न सके की ज़िन्दगी ने कैसे यु टर्न कर लिया
| ज़िन्दगी और मौत से बड़े करीब से दीदार किया है हमने कई बार| ज़िन्दगी मेंबार अगर
एक बार भी प्यार हो जाए तो कहने ही क्या है हालाँकि हासिल तो कुछ नहीं होता सिवाय
दर्द और तन्हाई के खासतौर से तब आप उस शख्स के लिए सब कुछ करते है और वाही शख्स आपको
न समझे और अपनी ही खुशियों की तलाश करे | खिलौने की तरह कोई खेलता है तो कोई
इस्तेमाल करता है , प्यार हमे इस मोड़ पे आज पहली बार ले आया की हम खुद को भूल गए
की हम कौन है क्या है और हमरी औकात क्या है सब प्यार ने हमे बता दिया , और हमने
प्यार करने जहमत उठा डाली और चल पड़े बिना कुछ सोचे समझे| ऊपर वाला भी बड़ा गजब खेल
खेता है ज़िन्दगी में उसे ही आपके सबसे करीब भेजेगा जो आपकी ज़िन्दगी को बदल देगा पर
कभी अपना न हो सकेगा भले ही आप कितनी भी सिददत से चाहों और उसके लिए हर पल हर लम्हा
ही क्यों न लुटा दो चाहे ज़िन्दगी में कितने भी कांटे आ जाए पसंद वाही आती है जिसका
किस्मत से कोई कनेक्सन नहीं होता है|
कोसता हूँ हर पल हर घडी उस
लम्हे को जब उसे देखकर चेहरे पर दिल से मुस्कान आइ, ज़िन्दगी से प्यार हुआ न जाने
क्या बात है उसमे आज तक नहीं पता चला, और दिल भी कितना कमीना होता है दगा दे ही
जाता है वन्ही जाकर बैठ जाता है जन्हा उसका ठिकाना नहीं | अक्सर उसी पे टिकता है जो नसीब में नहीं, दिल और दिमाग
काबू में न रहे तो ज़िन्दगी में हर वो काम हो जाते है जिससे कभी आप नफरत किया करते
थे और भले ही उन्ही कारणों से आप ने ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दुःख ही क्यों न देखा हो,
फिर भी किस्मत की बेवफाई बंद नहीं होती दगा देती ही रहती है, भले ही कितनी कोशिस
कर ले आप ज़िन्दगी में एक समय अँधेरा आ ही जाता है और प्यार के मायने समझा ही जाता
है | भले ही खुद का क्यों न प्रोपेगंडा बना लो बस उन्हें एक वजह चाहिए गलत समझने
की, इंसान प्यार में कमज़ोर तब पढ जाता है जब वो अपने प्यार की ख़ुशी के लिए सब कुछ
करने को तैयार हो जाता है और वक़्त उसकी ही खुशियाँ तलाशा करता है खुद को ही भूल कर कोई पागल कहना शुरू देता है तो कोई कहता
है फिलोसोफेर हो गए हो क्या है मुझे खुद नहीं पता क्या हूँ बस इतना जनता हु की खुद
में सही हूँ , ज़िन्दगी ने ऐसी करवट ली की समझ ही न सके की क्या हुआ और क्या हो रहा
है बस एक ही जगह अटके रहे और ज़िन्दगी की हर चीज दांव पर लग गई पर आज पता चला की
किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता है सिवाय खुद, कितना भी कर किसी के लिए कंही न कंही
किस्मत धोखा दे ही देती है और हम उसकी ख़ुशी तलाशने में जुटे रहते हैं हर वक़्त
जिसको खुद की ख़ुशी से तो प्यार है पर दूसरों की ख़ुशी से नहीं शायद यही ज़िन्दगी है,
ज़िन्दगी तो हमे सुरु से अभी तक कुछ न कुछ सीखा ही रही है,
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